23 Mar 2026, Mon

गढ़वा जिले के उचरी गांव निवासी विवेक (आईटीबीपी कमांडेन्ट) ने किया देश का नाम रोशन

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झारखंड जिले के लाल को राष्ट्रीय सम्मान- ITBP कमांडेंट विवेक कुमार पांडेय को मिला ‘सर्वश्रेष्ठ एंटी-नक्सल अभियान ट्रॉफी’

गढ़वा के उचरी निवासी बेटे ने किया देश का नाम रोशन

ब्यूरो रिपोर्ट

झारखंड के गढ़वा जिले के गौरव, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के कमांडेंट विवेक कुमार पांडेय को असाधारण ऑपरेशनल सफलता और उत्कृष्ट सामुदायिक सेवा के लिए ‘सर्वश्रेष्ठ एंटी-नक्सल बटालियन ट्रॉफी’ से सम्मानित किया गया है।

यह सम्मान ITBP के महानिदेशक प्रवीण कुमार ने जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में आयोजित वार्षिक बल स्थापना दिवस महानिदेशक परेड के दौरान प्रदान किया।

गढ़वा के बेटे की गौरव गाथा

गढ़वा जिला के मझिआंव थाना क्षेत्र के ऊंचरी ग्राम निवासी विवेक कुमार पांडेय, स्वर्गीय रामनाथ पांडेय के पुत्र हैं। पत्रकारिता और इतिहास में स्नातकोत्तर विवेक पांडेय 2003 से ITBP में सेवाएं दे रहे हैं।

वे जम्मू-कश्मीर, अरुणाचल प्रदेश, असम, उत्तराखंड, दिल्ली, केरल और वर्तमान में छत्तीसगढ़ के मानपुर स्थित 27वीं बटालियन में तैनात हैं।


उनकी इस उपलब्धि ने झारखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश को गर्वान्वित किया है।

उन्हें इससे पहले 2007 में असम में उल्फा विरोधी अभियानों में उत्कृष्ट कार्य के लिए सेनाध्यक्ष प्रशंसा डिस्क भी मिल चुकी है।

नक्सल मोर्चे पर निर्णायक सफलता

कमांडेंट विवेक पांडेय की 27वीं बटालियन ने छत्तीसगढ़ के मानपुर क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता दर्ज की —

1.अगस्त 2025 में हुई एक बड़ी मुठभेड़ में दो शीर्ष नक्सल कमांडरों विजय रेड्डी और लोकेश सलामे को मार गिराया गया।

2. बटालियन ने नौ अन्य शीर्ष नक्सली नेताओं (4 DVCM, 5 ACM) को गिरफ्तार या आत्मसमर्पण कराने में सफलता पाई।

3. छत्तीसगढ़ पुलिस के साथ संयुक्त अभियानों ने नक्सलियों की लॉजिस्टिक सप्लाई चेन को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।

यही वह इलाका है जहां 2009 में कोरकुट्टी मुठभेड़ में एसपी वी.के. चौबे सहित 28 जवान शहीद हुए थे।


सरकार की भी खुली सराहना

मई 2025 में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्वयं आईटीबीपी के सीतागांव ऑपरेटिंग बेस का दौरा कर

27वीं बटालियन और कमांडेंट विवेक पांडेय की सराहना की थी,और उनके नेतृत्व को “नक्सल उन्मूलन में निर्णायक भूमिका निभाने वाला” बताया था।

झारखंड के लिए गर्व का क्षण

विवेक पांडेय की यह उपलब्धि फोर्स की वीरता, अनुशासन और समर्पण का प्रमाण है।

झारखंड के इस सपूत ने साबित किया है कि अगर जज़्बा हो, तो कोई क्षेत्र दुर्गम नहीं।

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