मझिआंव:- कृषि बहुल क्षेत्र खजूरी नावाडीह पंचायत को मझिआंव नगर पंचायत क्षेत्र से अलग करने की मांग को लेकर ग्रामीणों ने खजूरी गांव के लकड़ही टोला अंबेडकर प्रतिमा के समीप एक सामूहिक बैठक आयोजित की। बिंदेश्वरी उर्फ अशोक पाल के अध्यक्षता में आयोजित बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि यदि उनकी मांगों पर प्रशासन द्वारा गंभीरता से विचार नहीं किया गया,तो आगामी नगर पंचायत चुनाव सहित लोकसभा एवं विधानसभा चुनाव में सामूहिक वोट बहिष्कार करेंगे। बैठक में पद्म भूषण पाठक,पूर्व उपाध्यक्ष भारत कुमार कुशवाहा, पूर्व वार्ड सदस्य ईबरार खान,उपेंद्र पाल, फ़रीद खान,सत्येंद्र तिवारी,आकाश राम,सहदेव राम, चितरंजन पाल विष्णु देव प्रजापति आदि लोगों ने एक स्वर में अपनी नाराजगी और पीड़ा को सामने रखा।
ग्रामीणों का कहना है कि खजूरी नावाडीह पंचायत के खजूरी,बीरबंधा, भूसुआ,आमर एवं बकोइया गांव मूल रूप से एक कृषि प्रधान गांव है, जहां की अधिकांश आबादी खेती-किसानी पर निर्भर है। नगर पंचायत क्षेत्र में शामिल किए जाने के बाद गांव की पारंपरिक ग्रामीण व्यवस्था और कृषि गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। ग्रामीणों ने बताया कि नगर पंचायत के नियम और कर प्रणाली किसानों के लिए बोझ बन गई है, जबकि उन्हें नगर क्षेत्र जैसी बुनियादी सुविधाएं आज तक उपलब्ध नहीं कराई गई हैं।
बैठक के दौरान किसानों ने कहा कि नगर पंचायत में शामिल होने के बाद उनसे हाउस टैक्स, जलकर और अन्य शुल्क वसूले जा रहे हैं। खेतों तक जाने वाले रास्ते बदहाल हैं, सिंचाई की समुचित व्यवस्था नहीं है और कृषि भूमि के उपयोग को लेकर भी कई तरह की परेशानियां उत्पन्न हो रही हैं।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि नगर पंचायत बनने के बाद खेती की जमीन को गैर-कृषि कार्यों में बदलने का दबाव बढ़ा है, जिससे किसानों की आजीविका पर खतरा मंडरा रहा है। कृषि बहुल क्षेत्र होने के बावजूद यहां के किसानों को न तो पर्याप्त सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है और न ही कृषि से जुड़ी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
सामूहिक बैठक में ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास किसानों और गांव की जरूरतों के अनुरूप होना चाहिए। उनका कहना है कि नगर पंचायत के बजाय यदि खजूरी नावाडीह पंचायत को ग्रामीण क्षेत्र के रूप में रखा जाए, तो यहां के लोगों को मनरेगा, कृषि योजनाओं और पंचायत स्तर की योजनाओं का बेहतर लाभ मिल सकेगा।
ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया, तो वे लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराते रहेंगे। साथ ही लोगों ने कहा कि हम किसानों के पास पैसे तो नहीं है लेकिन अपनी मेहनत की कमाई के धान एवं गेहूं बेचकर हाईकोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे। इसी क्रम में सर्वसम्मति से वोट बहिष्कार का निर्णय लिया गया, ताकि शासन-प्रशासन तक उनकी बात मजबूती से पहुंच सके। उन्होंने कहा कि वोट बहिष्कार उनका अंतिम विकल्प है, लेकिन मजबूरी में उन्हें यह कदम उठाना पड़ रहा है।
बैठक के अंत में ग्रामीणों ने एकजुटता का परिचय देते हुए कहा कि जब तक खजूरी नावाडीह पंचायत को मझिआंव नगर पंचायत क्षेत्र से अलग नहीं किया जाता और किसानों के हितों की रक्षा सुनिश्चित नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। ग्रामीणों ने प्रशासन और सरकार से अपील की कि वे इस मांग पर संवेदनशीलता के साथ विचार करें और कृषि बहुल इस क्षेत्र को उसका उचित दर्जा प्रदान करें। इस दौरान मुकेश मेहता, उपेंद्र पाल,शाहिद खान,दिलीप सिंह,बलराज मेहता मुस्तकीम खान मुन्ना राम एवं राजेंद्र चौधरी सहित काफी संख्या में ग्रामीण शामिल थे।