20 Feb 2026, Fri

मुआवजे की मांग को लेकर नहर निर्माण का काम बंद होने के बाद,भारी पुलिस बल एवं अधिकारियों के बीच कराई गई प्रारंभ

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अनुप सिंह

कांडी : नहर में जा रही बेहद उपजाऊ जमीन को लेकर किसानों द्वारा की जा रही मुआवजे की मांग को लेकर नहर निर्माण का काम बंद करा दिया गया था। उसे दरकिनार करते हुए वैपकौस कंपनी ने स्थानीय प्रशासन की मदद से पुलिस छावनी के बीच नहर खुदाई का काम शुरू करा दिया गया। मालूम हो कि वैपकौस कंपनी ने अनुमंडल पदाधिकारी गढ़वा को आवेदन देते हुए नहर निर्माण के लिए दंडाधिकारी एवं पुलिस बल की मांग की थी। इसके आलोक में अनुमंडल पदाधिकारी गढ़वा के पत्रांक 176 दिनांक 19 फरवरी 2026 के अनुसार कांडी अंचल पदाधिकारी राकेश सहाय को प्रधान दंडाधिकारी बनाते हुए अनुज कुमार सहायक अभियंता एवं संदीप गुप्ता अंचल निरीक्षक को बतौर दंडाधिकारी प्रतिनियुक्त करते हुए पुलिस बल के साथ कांडी थाना क्षेत्र के चोका गांव में नहर खुदाई प्रारंभ कराए जाने का निर्देश दिया गया था।

इसका अनुपालन करते हुए मौके पर वैपकौस कंपनी छ्द्वारा उत्तरी कोयल सिंचाई परियोजना के कांडी वितरणी नहर की खुदाई प्रारंभ करा दी गई।

इस मौके पर कांडी के प्रखंड विकास पदाधिकारी सह अंचल पदाधिकारी राकेश सहाय, पुलिस निरीक्षक बृज कुमार, अंचल निरीक्षक संदीप गुप्ता, अंचल के प्रधान सहायक देवेंद्र कुमार, राजस्व उप निरीक्षक दीपक कुमार यादव, सहायक अभियंता अनुज कुमार, कांडी थाना प्रभारी मोहम्मद अशफाक आलम के साथ बरडीहा थाना प्रभारी ऋषिकेश कुमार सिंह, मझिआंव थाना प्रभारी ओम प्रकाश टोप्पो एवं हरिहरपुर ओपी प्रभारी नसीम अंसारी दल बल उपस्थित थे। मालूम हो कि उत्तरी कोयल सिंचाई परियोजना से निकलने वाली कांडी वितरणी नहर की टोटल लंबाई 8.7 किलोमीटर का निर्माण 13. 22 करोड रुपए की लागत से किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि कांडी प्रखंड की यह पुरानी परंपरा रही है कि बिना मुआवजा दिए सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन कराया जाता है। यहां पर पिछले 10 – 12 साल पहले पथ निर्माण विभाग के द्वारा तीन सड़कों का निर्माण कराया गया है। लेकिन आज तक सैकड़ो किसान मुआवजा के लिए दर-दर की ठोकर खा रहे हैं। लेकिन आज तक किसी को एक पैसा मुआवजा नहीं मिला।

इस तरह की अन्य विभागों से सैकड़ो योजनाएं यहां कार्यान्वित की गई हैं जिनका किसी किसान को आज तक मुआवजा नहीं मिला। बताते चलें कि नई भूमि अर्जन नीति के अनुसार खेतिहर जमीन का बाजार मूल्य के चार गुना एवं मकान का 8 गुना मुआवजा भुगतान करने के बाद संबंधित किसान से लिखित प्रमाण पत्र लेकर योजना के अभिलेख में उसे लगाकर योजना कार्यान्वित करनी है। लेकिन यहां या तो किसानों को बरगला कर या जबरन जमीन लेकर योजना को पूरा कर लिया जाता है। भुक्त भोगी किसान जिए या मरे उसकी बला से।

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