21 हजार लेने के दो साल बाद भी नहीं हुआ केवला ऑनलाइन
उमेश कुमार
रमना – अंचल कार्यालय में बड़े पैमाने पर हो रही घुस खोरी, जिससे गरीब किसान मजदूर बेवस हैं। कोई भी इनका समस्या का समाधान करने वाला नहीं हैं। दाखिल ख़ारिज, भूमि सीमांकन, भूमि अतिक्रमण, केवाला ऑनलाइन इत्यादि अंचल कार्यालय से होने वाले कार्यों के लिए ग्रामीणों को दर दर भटकना पड़ रहा है। जन सेवक अब हो गए धन लेवक, बिना चढ़ावा का कुछ नहीं होता। इस कार्यालय में अंचल कार्यालय से ही सरकार को सबसे अधिक राजस्व की प्राप्ति होता हैं। जितना सरकार को राजस्व जाता है उससे कहीं अधिक इसके कर्मी अवैध घुस लेते हैं। बिना घुस का यदी कोई आम आदमी चाहे की उसका काम हो जाये तो समझ लीजियेगा की उसको साक्षात् भगवान से मुलाक़ात हो गया और उसे भगवान ने वरदान दे दिया।
सात केवाला को ऑनलाइन करने के लिए रमना पंचायत के उमेश प्रसाद गुप्ता से तत्कालीन कर्मचारी सह अंचल निरीक्षक दिवाकर सिंह ने 21 हजार रूपये लिया। इसके बावजूद भी आवेदक के केवाला ऑनलाइन नहीं किया गया। और पिछले दो वर्षो से आवेदक उमेश प्रसाद अंचल कार्यालय का चक़्कर लगा रहे हैं। इसी क्रम में अंचल कर्मी ने आवेदक से लिए गये 21 हजार रुपए में से दस हजार रूपये वापस कर दिया, लेकिन कोई काम नहीं किया।
अंचल कार्यालय का चक्कर लगाते-लगाते थक-हार कर पीड़ित ने उपायुक्त महोदय गढ़वा से न्याय की गुहार लगाया हैं।
इस सम्बन्ध में अंचलाधिकारी विकास पाण्डेय ने बताये की मेरे पास इस प्रकार का कोई शिकायत नहीं आया हैं।
ब्यूरो रिपोर्ट
सही मायने में देखा जाए तो अंचल कार्यालय में धन उगाही का अड्डा बनता जा रहा है। बिना चढ़ावे का अब कोई कार्य नहीं हो रहा है, बहुत ऐसे गरीब तबके के लोग हैं जो थक हार कर चुपचाप घर बैठ जाते हैं, क्योंकि चढ़ावा कम होने के कारण काम नहीं होता है, और दौड़ते-दौड़ते उनका जूता टूट जाता है, जिसके कारण वह घर बैठ जाते हैं। जिला अंतर्गत मझिआंव, रमना, बरडीहा, कांडी सहित लगभग सभी अंचल कार्यालय दलालों का अड्डा बन गया है। मझिआंव अंचल में प्रत्येक हल्का कर्मचारी के पास दो से चार दलाल लगे रहते हैं, और उनके सहारे ही अधिक कार्य किया जाता है। क्योंकि धन उगाही का खेल खेला जाता है। यहां तक की इस कार्यालय में बिना कर्मी के भी सरकारी कार्य करते हैं। अंचल कार्यालय क्षेत्र में यह भी चर्चा बना हुआ है कि कुछ लोग ऐसे हैं की सरकार के द्वारा चयनित कर्मी नहीं होने के बाद भी वे अंचल कार्यालय के दस्तावेज का कार्य करते हैं। इससे गोपनीयता भंग होने की संभावना बनी रहती है।