3 Feb 2026, Tue

सोना-चांदी की कीमतों से ग्रामीण बेहाल। महिलाओं और विवाह योग्य परिवारों पर सबसे ज्यादा असर

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उमेश कुमार

रमना:सोना और चांदी की लगातार रिकॉर्ड महंगाई बढ़ने से महिलाएं और विवाह योग्य परिवार गंभीर आर्थिक दबाव में महसूस कर रहे है। पिछले 13 महीनों में चांदी की कीमतों में करीब 306 प्रतिशत और सोने की कीमतों में 111 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज होने से संबंधित ज्वेलरी दुकानदारों में इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। ग्रामीण इलाकों में किसान,श्रमिक,निम्न और मध्यम वर्ग के लोग अब अपनी बेटियों के विवाह के लिए न्यूनतम आभूषण तक नहीं खरीद पा रहे हैं। शादी-ब्याह के सीजन में जहां पहले सीमित बजट में भी गहनों की व्यवस्था हो जाती थी। वहीं अब बढ़ती कीमतों ने परिवारों की कमर तोड़ दी है। कई जगहों पर विवाह की तारीखें आगे खिसकाई जा रही हैं या आभूषणों की मात्रा में भारी कटौती की जा रही है। स्थानीय ज्वेलरी दुकानदार संघ के अध्यक्ष अमित सोनी ने कहा कि सरकार एक ओर महिला सशक्तिकरण की बात करती है।तो दूसरी ओर भारी जीएसटी,ऊंचे आयात शुल्क और जमाखोरों पर सख्त कार्रवाई के अभाव में महिलाओं की वर्षों की बचत को मूल्यहीन होने दे रही है। इससे न केवल घरेलू अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है। बल्कि सामाजिक ताने-बाने पर भी असर पड़ रहा है। इधर बढ़ती कीमतों का दुष्प्रभाव सुनारों और स्थानीय कारोबारियों पर भी साफ दिख रहा है। मांग में गिरावट के कारण उनके रोजगार पर संकट मंडरा रहा है। कई कारीगरों को काम कम मिलने लगा है।

तो कुछ दुकानों ने अस्थायी तौर पर कारोबार समेटना शुरू कर दिया है।अन्य लोगों का मानना है कि यदि सरकार ने कीमतों पर नियंत्रण, आयात शुल्क में संतुलन और जमाखोरी पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की, तो इसका सबसे बड़ा खामियाजा महिलाओं को भुगतना पड़ेगा। मौजूदा हालात में यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि बढ़ती कीमतों की मार महिलाओं पर पड़ रही है।जबकि फायदा चुनिंदा जमाखोरों को मिल रहा है।हालांकि तीन दिन पूर्व से लगातार सोने चांदी के भावों में गिरावट से आम ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है।

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