कांडी : प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सतबहिनी झरना तीर्थ से 24 घंटे भक्ति की धारा प्रवाहित होने के साथ-साथ रात में यज्ञ मंडप एवं मंदिरों पर लाइटिंग से की गई सजावट अलौकिक दृश्य का सृजन कर रही है। रात के किसी भी प्रहर में लोग इस मनोहारी छटा को निहारते देखे जा रहे हैं। झरना घाटी में सतबहिनी भगवती माता महा दुर्गा महाकाली एवं महालक्ष्मी के मंदिरों की सजावट के साथ-साथ सेतु मार्ग पर रोशनी की टिमटिमाती लड़ियों की ऐसी सजावट की गई है जैसे लगता है कि आकाश के टिमटिमाते तारे सतबहिनी झरना तीर्थ की झरना घाटी में उतर आए हों।
यज्ञ मंडप में यज्ञाचार्य पंडित श्याम बिहारी वैद्य के नेतृत्व में याज्ञिक ब्राह्मणों की टोली के द्वारा मंत्रोच्चार के साथ पूजन एवं हवन से उत्पन्न यज्ञाग्नि एवं यज्ञ धूम्र के साथ मानस आचार्य पंडित सुवंश पाठक के नेतृत्व में वेदपाठी ब्राह्मणों के द्वारा प्रस्तुत श्री रामचरितमानस की दोहे, चौपाइयां एवं छंद से एक अलग ही धर्म एवं भक्ति की धारा प्रवाहित हो रही है। जबकि ज्ञान मंच से भारत के विभिन्न विशिष्ट मंचों से पधारे विद्वान प्रवक्ताओं के द्वारा मानस के साथ-साथ श्रीमद् भागवत महापुराण, श्री वेद एवं शास्त्रों के आख्यानों का प्रस्तुतीकरण पूरे क्षेत्र के वातावरण को भक्तिमय बना रहे हैं। अयोध्या धाम के विद्या कुंड से पधारे महामंडलेश्वर सिद्ध पीठाधीश्वर श्री श्री 1008 श्री महंत प्रेम शंकर दास जी महाराज के द्वारा धर्म के ऊपर विशद चर्चा की गयी। उन्होंने मानव जीवन में धर्म क्या है इसकी विस्तार से व्याख्या की। कहा कि धर्म केवल पूजा-पाठ या कर्मकांड नहीं, बल्कि मानव मूल्य, नैतिक आचरण और दूसरों के प्रति प्रेम व करुणा को धारण करना ही धर्म है।
नैतिकता ही धर्म है : जो हम दूसरों से अपने लिए नहीं चाहते, वैसा व्यवहार दूसरों के साथ न करना और जो हम दूसरों से अपने लिए चाहते हैं, वैसा ही व्यवहार दूसरों के साथ करना ही सबसे सरल और सटीक धर्म है।
कर्तव्य : धर्म जीवन की वह मान्यताएं हैं जो हमें गलत रास्ते पर जाने से रोकती हैं और इंसानियत सिखाती हैं, न कि आपस में लड़ाती हैं।
आंतरिक शुद्धि : केवल बाहर से धार्मिक दिखने से कुछ नहीं होता, जब तक हमारे विचार और नियत सात्विक न हों तब तक हम धार्मिक नहीं हो सकते।
सामाजिक एकता : धर्म वह है जो समाज को संगठित रखता और आपसी सामंजस्य बनाए रखता है। धर्म की सबसे सरल व्याख्या प्रस्तुत करते हुए महाराज जी ने कहा कि किसी की भी आत्मा को हमारी वजह से दुख नहीं पहुँचे यह दृढ़ निश्चय ही धर्म है। गुप्तकाशी से पधारे आचार्य सौरभ कुमार भारद्वाज ने संस्कारों की व्याख्या करते हुए कहा कि माता-पिता की आज्ञा का पालन करना ही संस्कार है। बड़ा भाई छोटे भाइयों को साथ लेकर चले यही संस्कार है। कहा कि भगवान श्री राम ने सभी छोटे भाइयों को साथ लेकर भोजन करने से संस्कार का ही आदर्श प्रस्तुत किया है। सतबहिनी झरना तीर्थ में स्थापित परंपरा के अनुसार मानस महायज्ञ के विश्राम दिवस को मां सतबहिनी झरना तीर्थ एवं पर्यटन स्थल विकास समिति के सचिव ज्योतिर्विद पंडित मुरलीधर मिश्रा ने आय व्यय का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे सतबहिनी झरना तीर्थ विराट स्वरूप धारण करते जा रहा है। वैसे-वैसे इसके देखरेख एवं रखरखाव के खर्चों में भी वृद्धि हो रही है। इस पर भी इस प्रसिद्ध धार्मिक पर्यटन स्थल से प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से जुड़े हुए लोगों को ध्यान देना होगा। उन्होंने इस क्षेत्र के साथ-साथ अनेक जिलों एवं भारतवर्ष के कई राज्यों से मानस महायज्ञ के साथ साथ साल में लगने वाले पांच मेलों एवं प्रतिदिन पधारने वाले श्रद्धालुओं को समिति की ओर से बहुत-बहुत धन्यवाद दिया। इसके साथ ही सभी विद्वत जनों एवं संत जनों के सतबहिनी झरना तीर्थ में आगमन को लेकर उनका हार्दिक आभार प्रकट किया।
जैसा की सब लोग जानते हैं कि आप ही के सहयोग से सतबहिनी झरना सतबहिनी झरना तीर्थ बनकर ख्याति अर्जित कर चुका है। अब हमें इसे इसी तरह के समर्पण और सहकार से तीर्थराज बनाना है। इसके लिए भी तन मन धन से समर्पित होकर काम करने का आज की शुभ बेला में हम सब संकल्प लें। यदि आयोजन के दौरान किसी को कोई त्रुटि महसूस हुई हो तो यह आपका ही कार्यक्रम है उन त्रुटियों को भूल कर आगे की सुधि लेंगे। इस मौके पर सतबहिनी को आपको साथ लेकर शून्य से शिखर तक पहुंचाने वाले समिति के अध्यक्ष सह विश्रामपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक नरेश प्रसाद सिंह, सचिव पंडित मुरलीधर मिश्र, कोषाध्यक्ष विभूति नारायण द्विवेदी, सभी सदस्य एवं सुदर्शन तिवारी, नवल किशोर तिवारी, आतिश कुमार सिंह, अशर्फी सिंह, राम ध्यान शाह, सुखदेव शाह, डॉक्टर प्रमोद कुमार सिंह, निरंजन सिंह, विनोद कुमार सिंह, अखिलेश प्रसाद सिंह सहित काफी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे। मानस महायज्ञ की पूरी अवधि में मंच का कुशल संचालन दिलीप कुमार पांडेय ने किया।