यज्ञ एक ऐसी प्रक्रिया है जो व्यक्ति की आत्मा को शुद्ध करती है, और समाज को एकजुट होने की प्रेरणा देता है : यज्ञाचार्य
अनुप सिंह
मझिआंव:- ब्लॉक रोड स्थित प्राचीन शिव मंदिर के प्रांगण स्थित नवनिर्मित शिवालय में यज्ञाचार्य श्री श्री 1008 श्री बाबा केशव नारायण दास के नेतृत्व में आयोजित शिव प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर रुद्र महायज्ञ की धूमधाम से शुरुआत हुई। इस ऐतिहासिक आयोजन में भाग लेने के लिए सैकड़ों भक्त और श्रद्धालु उपस्थित हुए। अरणी मंथन की प्रक्रिया के साथ इस यज्ञ की शुरुआत हुई।जिसे विशेष धार्मिक महत्त्व दिया गया। अरणी मंथन का पुरानी परंपरा से गहरा संबंध है और यह यज्ञ की शुरुआत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
रुद्र महायज्ञ का आयोजन विशेष रूप से भगवान शिव की प्राण प्रतिष्ठा एवं उपासना के लिए किया जा रहा है, ताकि उनके आशीर्वाद से समाज में शांति, समृद्धि और सुख-शांति का वास हो। इस महायज्ञ के आयोजन का उद्देश्य केवल धार्मिक कर्तव्यों का पालन करना ही नहीं है,बल्कि इससे क्षेत्रीय और सामाजिक सौहार्द को भी बढ़ावा देना है। यज्ञ आचार्य श्री श्री 1008 श्री बाबा केशव नारायण दास ने इस अवसर पर भक्तों को प्रेरित करते हुए कहा कि यज्ञ एक ऐसी प्रक्रिया है, जो व्यक्ति के आत्मा को शुद्ध करती है और समाज को एकजुट करने का कार्य करती है।
अरणी मंथन का महत्व खासतौर पर इस समय था, क्योंकि यह प्रक्रिया यज्ञ के परम तत्वों को सक्रिय करती है। अरणी मंथन में दो लकड़ियों का उपयोग होता है, जिन्हें घर्षण द्वारा अग्नि उत्पन्न करने के लिए घुमाया जाता है। इस अग्नि का प्रतीकात्मक रूप से शिव के निराकार रूप से जुड़ा हुआ है। मंथन से उत्पन्न अग्नि को यज्ञ के लिए पवित्र माना जाता है और इसे शिवजी की आहुति के रूप में अर्पित किया जाता है। अरणी मंथन के साथ ही यज्ञ की शुरुआत में विद्वान आचार्य विजय कांत दुबे एवं उनके सहयोगी संजय शास्त्री,सुधीर शास्त्री,कुंदन शास्त्री एवं हीरा शास्त्री के द्वारा मंत्रोच्चारण और शंखनाद से वातावरण में दिव्यता का संचार हुआ।
यज्ञ स्थल पर मंत्रों की गूंज और घनघोर पूजा अर्चना के बीच, यज्ञ आचार्य के नेतृत्व में रुद्र महायज्ञ की विधिपूर्वक शुरुआत हुई। इस अवसर पर सभी भक्तों ने भगवान शिव से सुख, समृद्धि, और स्वस्थ जीवन की कामना की। साथ ही यज्ञ में आहुति देने वाले सभी श्रद्धालुओं ने अपने पापों से मुक्ति की और अपनी जीवनशैली में सकारात्मक परिवर्तन की प्रार्थना की। उसके पश्चात यज्ञ मंडप की परिक्रमा की शुरुआत हुई।
यह रुद्र महायज्ञ न केवल धार्मिक अनुष्ठान है,बल्कि एक सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजन भी है। जिससे लोगों को भगवान शिव के प्रति श्रद्धा और भक्ति की प्रेरणा मिलती है। यज्ञ के माध्यम से सभी ने यह समझा कि भक्ति का मार्ग सच्ची तन्मयता और समर्पण का मार्ग का प्रशस्त मार्ग है। इस दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने को लेकर पुलिस बल तैनात थी।