ईंट-भट्ठा संचालकों को अपनी कमाई का निर्धारित हिस्सा डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) में भी जमा करना होगा
अनुप सिंह
गढ़वा:ईंट निर्माण के लिए मिट्टी के खनन हेतु पर्यावरण स्वीकृति के आदेश के खिलाफ दाखिल याचिका पर सोमवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई।सुनवाई के बाद अदालत कहा है कि ईंट निर्माण के लिए मिट्टी का खनन करने पर अब पर्यावरण स्वीकृति और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से संचालन की अनुमति (सीटीओ) लेना अनिवार्य होगा।ईंट-भट्ठा संचालकों को अपनी कमाई का निर्धारित हिस्सा डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) में भी जमा करना होगा। अदालत ने ईंट-भट्टा संचालकों की याचिका खारिज कर दी।
अदालत ने अपने निर्णय में कहा है कि ईंट बनाने में उपयोग होने वाली मिट्टी लघु खनिज की श्रेणी में आती है, इसलिए उस पर झारखंड माइनर मिनरल कंसेशन रूल्स, 2004 पूरी तरह लागू होंगे।ईंट निर्माण की प्रक्रिया मिट्टी के उत्खनन से शुरू होती है, इसलिए मिट्टी निकालने और ईंट बनाने की प्रक्रिया को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता। अदालत ने कहा कि मिट्टी भी पर्यावरण का अहम हिस्सा है और बड़े पैमाने पर इसके उत्खनन से भूमि, जल और वायु पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार पहले ही ईंट निर्माण में उपयोग होने वाली मिट्टी को लघु खनिज घोषित कर चुकी है। ऐसे में इसके उत्खनन पर खनिज से जुड़े सभी नियम लागू होंगे।
हाईकोर्ट ने कहा कि खनिज संसाधनों के उपयोग से पर्यावरण और स्थानीय आबादी पर असर पड़ता है।इसी प्रभाव की भरपाई और प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए डीएमएफटी फंड बनाया गया है। इसलिए ईंट-भट्ठा संचालकों को भी अन्य खनन गतिविधियों की तरह इस फंड में योगदान देना होगा।
बता दें कि राज्य के विभिन्न जिलों के ईंट भट्ठा संचालकों ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर दावा किया था कि ईंट निर्माण के लिए मिट्टी निकालना खनन की श्रेणी में नहीं आता।इसलिए इसके लिए न तो पर्यावरण स्वीकृति और न ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से संचालन के अनुमति की जरूरत है और न ही डीएमएफटी का भुगतान लिया जा सकता है।लेकिन हाईकोर्ट ईंट भट्ठा संचालकों की याचिका को खारिज कर दिया.