विष्णु गुप्ता
बड़कागांव प्रखंड के प्लस टू उच्च विद्यालय खेल मैदान में गोंदलपूरा कोल माइंस परियोजना के लिए मंगलवार को झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण परिषद के द्वारा लोक सुनवाई ,ग्रामीणों के भारी विरोध के कारण रद्द हो गया। इसकी आधिकारिक सूचना भूमि सुधार उपसमाहर्ता राजकिशोर प्रसाद ने जिला परिवहन अधिकारी कार्यालय हजारीबाग के द्वारा जारी पत्र को विधायक रोशन लाल चौधरी को लोक सुनवाई रद्द होने से संबंधित पत्र सौंपा और विधायक ने इसे लाउडस्पीकर से अलाउंस कर लोगों को लोकसुनवाई रद्द करने की महत्वपूर्ण जानकारी दी।
जनसुनवाई में पंडाल के अंदर कंपनी के समर्थक लोग बैठे हुए थे जिसकी जानकारी मिलते ही। आंदोलनकारी ग्रामीणों ने पंडाल को क्षतिग्रस्त कर दिया तथा सैकड़ो कुर्सियां तोड़ डाली, पंडाल को फाड़कर तहस नहस कर दिया। ग्रामीणों के गुस्से को देखते हुए कंपनी के समर्थक भाग खड़े हुए। जिसमें गिरने के दौरान कई लोगों को चोटें भी आई। ग्रामीणों की भारी विरोध एवं लोक सुनवाई रद्द करने की मांग को देखते हुए विधायक रोशन लाल चौधरी, पूर्व विधायक लोकनाथ महतो, पूर्व विधायक अंबा प्रसाद, विधानसभा सांसद प्रतिनिधि पूनम साहू स्थल पर पहुंचे एवं ग्रामीणों का समर्थन किया तथा उनकी मांगों को जायज बताया। वहीं विधायक रोशन लाल चौधरी ने कहा कि गोंदलपुरा के ग्रामीण जनता अपने हक अधिकार की लड़ाई संवैधानिक तरीके से लड़ रहे हैं, ग्रामीणों ने एकता का परिचय दिया, ग्रामीण भू रैयतों की एकता के सामने राज्य सरकार और जिला प्रशासन को झुकना पड़ा और जनसुनवाई को रद्द करना पड़ा। आगे उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की हक अधिकार की लड़ाई में, मैं हमेशा साथ खड़ा रहूंगा। लोक सनुवाई रद्द होने की घोषणा के बाद आंदोलन कर रहे ग्रामीण में काफी खुशी देखी गई। बताते चलें कि गोंदलपूरा गांव में विगत 1000 दिनों से अधिक समय से जेएसडब्ल्यू ,एनटीपीसी ,अदानी, एनएमडीसी एवं अन्य कोल ब्लॉक के खिलाफ कोल खनन परियोजना को रद्द करने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन किया जा रहा है। जिसका असर तेजी से अन्य गांव में भी देखी जा रही है। आंदोलनकारी विकास कुमार ने कहा की जल जंगल जमीन को बचाने के लिए हम लोग कंपनी के खिलाफ अंतिम सांस तक लड़ाई लड़ते रहेंगे। किसी भी हालत में कंपनी खुलने नहीं देंगे।
पर्यावरणीय लोक सुनवाई के लिए प्रशासन के द्वारा प्रचार प्रसार के लिए पर्चा तक नहीं बांटा गया। खुले मैदान में करना चाहिए था पंडाल के अंदर नहीं।
विधि व्यवस्था को शांतिपूर्ण बनाए रखने को लेकर जिला प्रशासन एवं स्थानीय प्रशासन के द्वारा भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किए गए थे एवं सभी गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जा रही थी । जिसमें एसडीओ, एलआरडीसी, बीडीओ, एससडीपीओ, थाना प्रभारी समेत भारी संख्या में सशस्त्र पुलिस बल उपस्थित थे।




