मझिआंव- मझिआंव एवं बरडीहा प्रखंड क्षेत्र के आधा दर्जन गांवों में बेखौफ होकर अवैध रूप से आरा मशीन चलाये जाने की सूचना है.ग्रामीण सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मझिआंव प्रखंड के बिडंडा में,टड़हे गांव में, दवनकारा गांव में,करकटा गांव में आरा मशीन तथा बरडीहा प्रखंड के ओबरा में तथा सरसतिया गांव में आरा मशीन लोगों द्वारा समय समय पर संचालित किया जाता है और जैसे ही लकड़ी चीरने का काम खत्म होता है, वैसे ही उसे छुपा दिया जाता है।बताया जाता है कि ओबरा गांव में पिछले सप्ताह भवनाथपुर उतरी वन प्रमंडल द्वारा छापेमारी कर एक आरा मशीन जब्त किया गया था लेकिन वहीं से ठीक आधे किलामीटर दूरी पर सरसतिया गांव में नदी किनारे चल रहे आरा मशीन को इसलिए नजरअंदाज कर दिया गया कि उक्त आरा मशीन के संचालक पर एक फोरेस्टर की कृपा दृष्टि प्राप्त है।
ग्रामीणों ने बताया कि वर्तमान में मझिआंव प्रखंड के टड़हे गांव में स्थानीय बाजार से लगभग दो सौ मीटर दूर मुख्य पथ के दक्षिण में एवं बरडीहा प्रखंड के सरसतिया गांव में नदी किनारे बेखौफ होकर आरा मशीन चलाया जा रहा है।
इस संबंध में बुद्धिजीवियों का कहना है कि आरा मशीन के संचालन से आस पास के जंगल नष्ट होने के कगार पर पहुंच गए हैं।इसके साथ ही ग्लोबल वार्मिंग का खतरा भी बढ़ गया है। बताया जाता है कि यह खतरा धीरे धीरे भयावह स्थिति में पहुंच रहा है जिसके कारण मौषम का उतार चढ़ाव देखने को मिल रहा है। अगर यही स्थिति जारी रही तो मनुष्य के जीवन पर भी अनदेखा संकट बढ़ रहा है। स्थानीय लोगों ने कहा कि वन विभाग की चुप्पी सबसे आश्चर्यजनक बात है। जबकि आरा मशीन के संचालक खुलेआम यह कहते देखे जा रहे हैं कि उनका डीएफओ से बात हो गया है, कोई दिक्कत नहीं है।
डीएफओ का सरकारी नम्बर है बंद
इस संबंध में बात करने के लिए गढ़वा उतरी वन विभाग के डीएफओ अंशुमान से उनके सरकारी मोबाइल नंबर 8987790237पर सम्पर्क करने की कोशिश की गई तो कम्प्यूटर द्वारा बताया गया कि यह नम्बर उपयोग में नहीं है।
इसके बाद रेंजर प्रमोद कुमार से बात की गई तो उनके द्वारा बताया गया कि उनका ऑपरेशन हुआ है, बाहर में हॉस्पिटल में हैं।