कांडी-प्रखण्ड स्थित कोयल नदी से बालू का अवैध खनन व परिवहन लगातार जारी है। ऐसा लगता है कि मानो यहां के शासन प्रशासन की मिली भगत से बालू की अवैध खनन की जा रही है। बालू के अवैध परिवहन में दर्जनों ट्रैक्टर लगे हुए हैं। जो कोयल नदी के विभिन्न घाटों से बालू का अवैध खनन करते हुए उसका परिवहन में लगे हुए हैं। कोयल नदी के मोखापी, सोहगड़ा,जयनगरा ,कोरगांई,रानाडीह सहित अन्य घाटों से पूरी रात अवैध खनन व परिवहन हो रहा है। मोखापी के सामने कोयल नदी में बने गाईड बांध को काट कर बांध से लगभग 100 मीटर की दूरी से खनन किया जा रहा है।
बालू के खनन से तटबंध के अस्तित्व पर खतरा हो सकता है। वहीं सोहगाड़ा टेढ़ी महुआ घाट से तटबंध से मात्र लगभग 50 मीटर की दूरी से बालू खनन किया जा रहा है। बालू के लगातार खनन से कोयल नदी में बड़े बड़े गड्ढे बन गए हैं। जहां जहाँ बालू का उठाव हो रहा है, मोखापी में ट्रैक्टर को आने जाने के को लेकर तटबंध को भी काट दिया गया है।मोखापी गाँव के बाद आगे कोयल नदी के पश्चिम किनारे में बना तटबंध समाप्त हो जाती है। अवैध बालू के खनन से कोयल नदी में बने गढ्ढे भविष्य में मानव जीवन के लिए खतरा पैदा करता है।उन गड्ढों में पानी भर जाने के बाद लोगों के लिए खतरा पैदा करता है। कई बार जान माल का नुक़सान भी देखने को आया है। इस तरह से बालू के अवैध खनन व परिवहन से सरकार को राजस्व का काफी नुकशान उठाना पड़ रहा है।आखिर कब तक बालू के अवैध खनन पर अंकुश लगेगा।यह लोगों में सवाल बना हुआ है। ग्रामीणों ने तो यह भी बताया कि रात्रि में ट्रैक्टर की स्पीड से और आवाज से लोगों में निरंतर डर बना रहता है।
मिली प्राप्त जानकारी के अनुसार कोरगांई- मोखापी घाट से सरकोनी के तिन ट्रैक्टर, पतीला से एक ट्रैक्टर, जयनगरा घाट से खरौंधा से 2 ट्रैक्टर, चोका से एक ट्रैक्टर, कोरगांई घाट से पांच ट्रैक्टर चलता है। सोहगाड़ा घाट से पांच से सात ट्रैक्टर चलता है।इसी तरह अन्य घाटों से दर्जनों ट्रैक्टर चलते हैं। वहीं मिली जानकारी के अनुसार कोरगांई गांव के सामने एक नया घाट भी बनाया गया है। लोगों ने कहा कि बालू माफियाओं का शासन प्रशासन की साठ गांठ है जिसके कारण जगह-जगह अवैध बालू ढुलाई के लिए घाट बनाए जा रहे हैं।
इस संबंध में पूछे जाने पर डिस्टिक माइनिंग ऑफिसर (डीएमओ) राजेंद्र उरांव ने बताया कि अगर इस तरह से अगर अवैध खनन चल रही है तो अवश्य कार्रवाई की जाएगी।