मझिआंव: नगर पंचायत क्षेत्र के चन्द्री स्थित गायत्री शक्तिपीठ परिसर में गायत्री परिवार द्वारा कंबल वितरण समारोह का आयोजन किया गया। समारोह की शुरुआत गायत्री परिवार के जिला संयोजक विनोद पाठक, महिला मंडल की जिला संयोजक श्रीमती शोभा पाठक,जिला ट्रस्टी अच्युतानंद तिवारी,युवा मंडल के जिला संयोजक बीरेंद्र सोंनी,समाजसेवी पूर्व प्रधानाध्यापिका श्रीमती सत्या दुबे,शिक्षक शिव प्रसाद एवं श्रीमती शोभा जायसवाल आदि अतिथियों के द्वारा गायत्री महामंत्र के संयुक्त जाप एवं टीका चंदन लगाकर की गई। इस अवसर पर विकलांग, बृद्ध व असहाय 251लोगों के बीच कंबल का वितरण किया गया। इस अवसर पर जिला संयोजक बिनोद पाठक ने गायत्री महामंत्र के महत्व को बताते हुए कहा कि इस महामंत्र को विज्ञान भी मानता है। एक बार के गायत्री महामंत्र के जब से 01 लाख10 हजार तरंगे उत्पन्न होती हैं, जो नित्य गायत्री महामंत्र का जाप करता है उसमें इतनी शक्ति एवं ऊर्जा उत्पन्न हो जाती है कि वह भगवान से भी अधिक शक्तिशाली एवं ऊर्जावान बन जाता है। श्री पाठक ने गायत्री परिवार के संस्थापक पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के विचार क्रांति अभियान को विस्तार से बताते हुए कहा कि वर्तमान समय में जिस तरह गली-गली में रावण एवं कंस घूम रहे हैं की बेटियां सुरक्षित महसूस नहीं करती हैं। इसलिए गुरुदेव ने सोंचा कि इतने घर घर में बढ़े रावण को मारने के लिए भगवान को बहुत से अवतार लेने होंगे, जो सम्भव नहीं है। इसलिए गुरुदेव ने सभी लोगों के विचारों में परिवर्तन लाकर देव तुल्य बनाने के लिए विचारक्रांति अभियान की सुरुआत की,और इसका आधार गायत्री महामंत्र को बनाया और कहा कि इसके नित्य जाप करने से मनुष्य में एक तरफ राक्षसी प्रवृति खत्म होगी दूसरी तरफ वे भगवान से भी अधिक शक्तिशाली एवं ऊर्जावान हो जायेंगे।
इस अवसर पर महिला मंडल की जिला संयोजक श्रीमती शोभा पाठक ने कहा कि नारियां ना कभी अबला थी और न है और ना रहेगी। नारी ही ऋषि मुनियों एवं महामानों की जन्मदाता हैं। मुगल काल में महिलाओं को दबाया गया,उन्होंने नारियों को आह्वान करते हुए कहा कि वह अपने बच्चों में कूट-कूट कर संस्कार भरें जिससे बच्चे संस्कारवान एवं विद्वान हों। उन्होंने आज के नारियों पर कटाक्ष करते हुए कहा की नारियां जिस तरह अपनी संस्कृति को भूलकर पाश्चात्य संस्कृति को अपना रही है वह रास्ता रास्ता पतन की ओर जा रहा है। आज वस्त्र फैशन के नाम पर कैसी वस्त्र पहन रही है यह कहने की बात नहीं है। अभी भी संभल जाओ नहीं तो रोने वाला भी नहीं मिलेगा इतिहास साक्षी है की नारियों का इतिहास सतियों एवं वीरांगनाओं से भरा पड़ा है। जिन्होंने वीरों एवं विद्वानों को जन्म दिया। उन्होंने सनातन संस्कृति को अपनाने की अपील सभी नारियों से की। इस अवसर पर कार्यक्रम का संचालन गायत्री परिवार के प्रखंड संयोजक नागेंद्र सिंह द्वारा किया गया।
मौके पर का विचार ठीक है बेचन राम, अशोक चौरसिया,सुनीता चौरसिया,इंगलेश दुबे, अनिल कमलापुरी,रामविलास प्रसाद, शगुन देव सिंह, रानी देवी,अशोक साह,अशोक विश्वकर्मा, बबलू सोनी,सीमा सोनी,कामेश्वर सोनी,लीलावती सोनी,विनय पाठक,एवं गुड्डू पाठक उपस्थित थे।