रमना – प्रखंड में समुचित चिकित्सिय सुविधा का घोर आभाव और आजादी के 78 वर्ष बाद भी गरीब मजदूर एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को समुचित चिकित्सिय सुविधा नहीं मिल पाने के कारण असमय ही काल के मुँह में समा जाते है।
इसी का जीता जागता उदारहण है।
सिलीदाग पंचायत के प्रदीप विश्वकर्मा के 58 वर्षीय पत्नी कुंती देवी कि मृत्यु, जिसने चिकित्सा के मौलिक अधिकार को हाथी का दाँत साबित कार दिया है।
ग्रामीणों के अनुसार कुंती देवी गत वर्षो से जोड़ो के दर्द से पीड़ित थी, जिनका ईलाज अंग्रेजी दवा से काफी दिनों तक कराया गया, लेकिन दर्द से राहत नहीं मिला, इसके बाद किसी के सलाह पर जड़ी बूटी दवाई लेना शुरू किया इससे भी कोई विशेष लाभ नहीं हुआ।इसी क्रम में एकलौता कमाऊ पुत्र को जेल हो गया, जिससे घर कि माली हालत खस्ता हो गया और दवा खर्चा भी नहीं चल पाने के कारण दवाई बंद हो गया। इसके बाद सिर में एक घाव हुआ फिर बाह में इसके बाद पुरे शरीर में फैल गया जिसका समुचित ईलाज नहीं हो सका,शरीर के घाव में कीड़ा हो गया था, शुक्रवार को शाम को भयंकर यातना के बाद अंतिम सांस ली। पैसे के आभाव में पुत्र पैरोल पर बाहर नहीं आ सका, एकलौते पुत्र का अंतिम शव यात्रा में नहीं पहुंच पाने को ग्रामीणों द्वारा दुर्भाग्यपूर्ण समय होने कि बात चर्चा का विषय बना रहा। मृतक का अंतिम संस्कार सतबहिनी नदी तट पर किया गया, मुख़ागनी पति प्रदीप विश्वकर्मा ने दिया।