मझिआंव:- चैतन्य महाप्रभु के प्राकट्य दिवस के पावन अवसर पर इस्कॉन इकाई मझिआंव के सदस्यों के द्वारा भव्य नगर संकीर्तन भ्रमण एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। हरिनाम संकीर्तन के साथ शोभायात्रा प्रारंभ हुई, जिसमें श्रद्धालुजन मृदंग, करताल और झांझ की मधुर ध्वनि पर ‘हरे कृष्ण, हरे राम’ महामंत्र का कीर्तन करते हुए नगर भ्रमण पर निकले। संकीर्तन यात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी जहाँ स्थान-स्थान पर भक्तों एवं स्थानीय नागरिकों के द्वारा स्वागत किया।
इस अवसर पर भक्तों ने चैतन्य महाप्रभु के जीवन, उनके प्रेम, करुणा और भक्ति आंदोलन के संदेश का स्मरण किया।इस दौरान वक्ताओं ने बताया कि महाप्रभु ने नाम-संकीर्तन को ही कलियुग में ईश्वर प्राप्ति का सरलतम मार्ग बताया। साथ ही कहा कि अंतर्राष्ट्रीय श्री कृष्ण भावनामृत संघ एक वैश्विक धार्मिक संगठन है जो भगवान श्री कृष्ण के भक्ति पर आधारित वैष्णव संप्रदाय की शिक्षाओं का प्रचार करता है। बताया कि 1966 में ए सी भक्ति वेदांत स्वामी प्रभुपाद चैतन्य महाप्रभु द्वारा स्थापित किया आंदोलन आज हरे कृष्णा संकीर्तन और वेदांत पर आधारित जीवन शैली के लिए जाना जाता है। कहां की इस्कॉन का मुख्य उद्देश्य भगवत गीता और श्रीमद् भागवतम में वर्णित कृष्ण भक्ति का प्रचार करना है।कार्यक्रम स्थल पर विशेष आरती, भजन-कीर्तन तथा प्रवचन का आयोजन हुआ। अंत में सभी उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया।
यह आयोजन न केवल आध्यात्मिक चेतना जागृत करने वाला रहा, बल्कि समाज में प्रेम, एकता और भाईचारे का संदेश भी प्रसारित करने में सफल रहा।